Poetry

बाँट दिया इस जमीन को, चाँद सितारों का क्या होगा?
नदियों के कुछ नाम रख दिये , बहती धारों का क्या होगा?

शिव की गंगा भी पानी है, काबे ज़मज़म भी पानी है,
मुल्ला भी पिए पंडित भी पिए, पानी का मज़हब क्या होगा?

इन फिरकापरस्तों से पूछो क्या सूरज अलग बनाओगे?
एक हवा में साँस है सबकी, क्या हवा भी नयी लाओगे?

नस्लों का करे जो बटवारा रहबर वो कौम का ढोंगी है,
क्या खुदा ने मंदिर तोडा था? या राम ने मस्जिद तोड़ी है

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